UP SI परीक्षा विवाद: “अवसरवादी कौन?” सवाल में ‘पंडित’ विकल्प पर बवाल

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

एक परीक्षा का सवाल। चार विकल्प। और उनमें लिखा एक शब्द — “पंडित”। बस… इतना काफी था।

उत्तर प्रदेश की SI भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक सवाल ने अचानक सोशल मीडिया से लेकर पुलिस थाने तक बहस छेड़ दी है। सवाल था — “अवसरवादी कौन है?” और विकल्पों में “पंडित” को भी शामिल किया गया।

कई अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। मामला इतना बढ़ा कि लखनऊ के हजरतगंज थाने में लिखित शिकायत (तहरीर) दे दी गई।

अब यह सिर्फ परीक्षा का प्रश्न नहीं रहा…यह सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक पहचान की बहस बन गया है।

हजरतगंज थाने में तहरीर, परीक्षा प्रश्न पर आपत्ति

लखनऊ के हजरतगंज थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा में पूछे गए इस प्रश्न ने एक समुदाय की छवि को नकारात्मक रूप में पेश किया। शिकायत में कहा गया है कि इस तरह का विकल्प किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल करना
अभ्यर्थियों और समाज दोनों के लिए अनुचित संदेश देता है।

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि प्रश्नपत्र बनाने वाली एजेंसी से जवाब मांगा जाए। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसे सवालों को रोका जाए।

‘घूसखोर पंडत’ से शुरू हुई बहस फिर तेज

दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में एक वेब सीरीज “घूसखोर पंडत” को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस चल रही थी। उस विवाद के शांत होने के बाद अब परीक्षा प्रश्न में “पंडित” विकल्प सामने आने से कई लोग इसे एक पैटर्न के रूप में देखने लगे हैं।

कुछ यूजर्स का कहना है कि “ब्राह्मण या पंडित शब्द अब सोशल मीडिया और कंटेंट में आसान टारगेट बनता जा रहा है।”

प्रतियोगी परीक्षाओं में संवेदनशीलता क्यों जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न बनाते समय सामाजिक संवेदनशीलता बेहद जरूरी होती है। क्योंकि ये परीक्षाएं सिर्फ ज्ञान नहीं बल्कि प्रशासनिक सोच और नैतिक समझ भी परखती हैं।

ऐसे में किसी भी शब्द या समुदाय का संदर्भ अगर गलत तरीके से पेश हो जाए तो वह विवाद का कारण बन सकता है। इसी वजह से कई संस्थान अब प्रश्नपत्र तैयार करते समय सांस्कृतिक और सामाजिक संतुलन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

असली सवाल अभी बाकी है

फिलहाल हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे क्या कार्रवाई होती है। क्या प्रश्नपत्र बनाने वाली संस्था सफाई देगी? क्या जांच बैठेगी?

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